सुप्रीम कोर्ट समझाता है : पिता की कमाई संपत्ति में भी बेटियों का हक, बेटा नहीं हो तो बेटियां ही पिता की संपत्ति की हकदार

Judgment – Supreme Court 20.01.2022

अरुणाचल गौंडर (मृत) बनाम पोन्नुसामी
CIVIL APPEAL NO. 6659 OF 2011
बेंच – न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी

क्या एक इकलौती बेटी को अपने पिता की अलग-अलग संपत्ति (हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के लागू होने से पहले) विरासत में मिल सकती है।

“हिंदू पर्सनल लॉ के संहिताकरण से पहले भी बेटियों को अपने पिता की संपत्ति पर समान अधिकार

संपत्ति के बंटवारे पर भी विरासत लागू होगी, भले ही पिता की मृत्यु 1956 से पहले हो गई हो। साथ ही परिवार के अन्य संपार्श्विक सदस्यों पर उन्हें वरीयता मिलेगी”

Continue reading “सुप्रीम कोर्ट समझाता है : पिता की कमाई संपत्ति में भी बेटियों का हक, बेटा नहीं हो तो बेटियां ही पिता की संपत्ति की हकदार”

CPC 1908 CHART – Section With Order Relation

सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के भागों एवं धाराओं का वर्गीकरण

🛑 Part 1. सिविल कार्यवाहियों में सामान्य प्रक्रिया

A. कार्यवाही का प्रथम चरण

➡️ वाद सामान्यतः [ भाग -1 धारा 9 से 35 ख ]

• वाद कब किया जा सकेगा ? ( धारा -9 सपठित धारा 10 से 14 )

• वाद कहाँ किया जायेगा ? ( धारा 15 से 25 )

Continue reading “CPC 1908 CHART – Section With Order Relation”

एनडीपीएस (संशोधन) विधेयक , 2021 [NDPS Amendment ACT 2021]

नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985

  • यह अधिनियम मादक औषधि और मनोदैहिक पदार्थों से संबंधित निर्माण, परिवहन और खपत जैसे कार्यों को नियंत्रित करता है।
  • अधिनियम के तहत, कुछ अवैध गतिविधियों का वित्तपोषण जैसे कि भांग की खेती, मादक औषधि का निर्माण या उनसे जुड़े व्यक्तियों को शरण देना एक प्रकार का अपराध है।
  • इस अपराध के दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों को 10 से 20 वर्ष का कठोर और कम-से-कम 1 लाख रुपए के जुर्माने से दंडित किया जाएगा।
  • यह नशीले पदार्थों और मनोदैहिक पदार्थों के अवैध व्यापार से अर्जित या उपयोग की गई संपत्ति को ज़ब्त करने का भी प्रावधान करता है।
  • यह कुछ मामलों में मृत्युदंड का भी प्रावधान करता है जब एक व्यक्ति बार-बार अपराधी पाया जाता है।
  • इस अधिनियम के तहत वर्ष 1986 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का भी गठन किया गया था।
Continue reading “एनडीपीएस (संशोधन) विधेयक , 2021 [NDPS Amendment ACT 2021]”

CRPC की धारा 427 सुप्रीम कोर्ट ने समवर्ती सजा देने के सिद्धांतों का सारांश दिया

सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच जिसमें जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना शामिल हैं, ने ट्रायल कोर्ट की शक्तियों को यह तय करते हुए अपने विवेक का उपयोग करने के लिए बरकरार रखा है कि धारा 427 सीआरपीसी पर लागू सिद्धांतों को निर्धारित करते हुए बाद की सजा में सजा एक साथ या लगातार चलनी चाहिए।

अदालत ने इस सवाल पर विचार किया कि क्या अपीलकर्ता के खिलाफ दो अलग-अलग अदालतों द्वारा दो अलग-अलग परीक्षणों में आरोपित सजा एक साथ चलनी चाहिए, जैसा कि अपीलकर्ता की ओर से प्रस्तुत किया गया है

Continue reading “CRPC की धारा 427 सुप्रीम कोर्ट ने समवर्ती सजा देने के सिद्धांतों का सारांश दिया”

IPC 1860 अपराधिक मानव वध और हत्या का अपराध

मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले अपराध

भारतीय दंड संहिता 1860 के अध्याय 16 के अंतर्गत मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले अपराधों के संबंध में विस्तार से प्रावधान किए गए। यदि महत्ता दृष्टि से देखा जाए तो भारतीय दंड संहिता का अध्याय 16 संपूर्ण दंड संहिता का हृदय मालूम होता है। यूं तो हर एक अपराध समाज के लिए घातक होता है तथा राज्य का यह कर्तव्य होता है कि वह किसी भी प्रकार के अपराध को करने वालों को दंडित करें परंतु भारतीय दंड संहिता के अध्याय 16 के अंतर्गत दिए गए मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले अपराध चिरकाल से महत्वपूर्ण अपराध रहे।

वर्तमान परिक्षेप में राज्य का कर्तव्य कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है परंतु जिस समय से सत्ता और शासन अस्तित्व में आया उस समय से ही राज्य का यह कर्तव्य है कि वह अपने नागरिकों के जीवन की रक्षा करें, नागरिकों के शरीर संपत्ति और उनकी प्रतिष्ठा की रक्षा करना राज्य का परम कर्तव्य है। शरीर, संपत्ति, प्रतिष्ठा में सर्वोच्च स्थान शरीर का है क्योंकि जीवन से अधिक मूल्यवान कुछ भी नहीं है। जीवन सर्वोच्च है कोई भी विचार मानव जीवन को सर्वोच्च मानता है, इस धरती पर मनुष्य को सर्वोच्च प्राणी माना गया है तथा किसी दूसरे मनुष्य को किसी प्रकार से उपहति कारित करना दंडनीय अपराध है। प्रत्येक राज्य का यह कर्तव्य होता है कि वह अपने प्रत्येक नागरिक के शरीर की रक्षा करें।

Continue reading “IPC 1860 अपराधिक मानव वध और हत्या का अपराध”