भारतीय दंड संहिता से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रश्नों की प्रश्नावली

Q. 1 जंगम सम्पत्ति से आप क्या समझते हैं ?

A.

धारा 22 के अनुसार – जंगम संपत्ति इन शब्दों से यह आशयित है कि इनके अन्तर्गत हर विवरण की मूर्त संपत्ती आती है,

किन्तु भूमि और वे चीजें, जो पृथ्वी से जुडी(भूबद्ध) हों या पृथ्वी (भूबद्ध) के किसी चीज से स्थायी रुप से जकडी हुई हों, इनके अन्तर्गत नहीं आती ।

Q. 2 “सदोष अभिलाभ” “सदोष हानि” क्या है ?

A.

➡️ सदोष अभिलाभ

धारा 23 के अनुसार- सदोष अभिलाभ विधि विरुद्ध साधनों द्वारा ऐसी सम्पत्ति का अभिलाभ है जिसका वैध रूप से हकदार अभिलाभ प्राप्त करने वाला व्यक्ति न हो ।

Continue reading “भारतीय दंड संहिता से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रश्नों की प्रश्नावली”

जानिए भारतीय ध्वज संहिता, 2002 संशोधन से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान

हाल ही में भारत सरकार ने घोषणा की है कि राष्ट्रीय ध्वज ‘‘जहाँ ध्वज खुले में प्रदर्शित किया जाता है या किसी नागरिक के घर पर प्रदर्शित किया जाता है, इसे दिन-रात फहराया जा सकता है।’’

  • सरकार ने इससे पहले मशीन से बने और पॉलिएस्टर के झंडे के उपयोग की अनुमति देने के लिये ध्वज संहिता में संशोधन किया था।
  • सरकार ने हर घर तिरंगा अभियान शुरू करने के साथ ही गृह मंत्रालय ने भारतीय ध्वज संहिता, 2002 में संशोधन किया है ताकि रात में भी राष्ट्रीय ध्वज को फहराया जा सके।
Continue reading “जानिए भारतीय ध्वज संहिता, 2002 संशोधन से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान”

[ CRPC 1973 ] जांच के दौरान किसी संपत्ति को जब्त करने की पुलिस की शक्ति – पुलिस वास्तव में क्या जब्त कर सकती है ?सीआरपीसी की धारा 102 का दायरा

परिचय 

आप कैसे प्रतिक्रिया देंगे अगर मैं आपको बता दूं कि सीआरपीसी की धारा 102 पुलिस अधिकारियों को आपकी किसी भी संपत्ति को जब्त करने की शक्ति प्रदान करती है ? कल्पना कीजिए, आपके पड़ोस में एक अपराध किया गया है और पुलिस आपकी संपत्ति को इस संदेह पर जब्त कर लेती है कि आप उस विशेष अपराध के पीछे मास्टरमाइंड हो सकते हैं। ऐसे में आप क्या करेंगे? 

पुलिस की शक्ति पर उस क्षण आप शायद खुद को आहत और असहाय महसूस करेंगे। ठीक है, आप सोच रहे होंगे कि आप एक ऐसे देश का हिस्सा हैं जहां पुलिस केवल संदेह पर ही सब कुछ कर सकती है। वैसे अगर आपको इस तरह की कोई शंका है तो यह लेख आपके लिए ज्यादातर चीजों को साफ कर देगा।

यह लेख चर्चा करने जा रहा है कि सीआरपीसी की धारा 102 के तहत पुलिस वास्तव में क्या जब्त कर सकती है ? इसके अलावा, सीआरपीसी की धारा 102 के दायरे से बाहर क्या है ? क्या पुलिस अधिकारी सीआरपीसी की धारा 102 के दायरे में अचल और चल संपत्ति दोनों को जब्त करने के लिए अधिकृत (ऑथराइज्ड) हैं या नहीं।

यह लेख उन निर्णयों और मामलो का भी विश्लेषण करेगा जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से धारा 102 से संबंधित हैं। इसके अलावा, अचल संपत्ति की जब्ती से संबंधित आगे के संशोधनों में कुछ सुझाव और सिफारिशें भी हैं जिन्हें पुलिस अधिकारियों द्वारा लागू किया जा सकता है या उनका ध्यान रखा जा सकता है। 

Continue reading “[ CRPC 1973 ] जांच के दौरान किसी संपत्ति को जब्त करने की पुलिस की शक्ति – पुलिस वास्तव में क्या जब्त कर सकती है ?सीआरपीसी की धारा 102 का दायरा”

[ IEA 1872 ] “परिस्थितियां स्वयं बोलती हैं” विभिन्न न्यायिक निर्णयों के साथ एक विस्तृत विश्लेषण

उपेक्षा अथवा असावधानी के सम्बन्ध में यह एक महत्वपूर्ण नियम या सिद्धांत है ! इसे “घटना स्वयं प्रमाण है” अथवा “चीज स्वयं बोलती है” का नियम या सिद्धांत भी कहा जाता है ! 

सामान्य नियम यह है कि घटना के लिए प्रतिवादी की उपेक्षा अथवा लापरवाही को साबित करने का भार स्वयं वादी पर होता है !

ऐसे मामलों में प्रतिवादी को यह साबित करना होता है कि उसने कोई लापरवाही नहीं बरती है ! लेकिन यह कोई निरपेक्ष नियम नहीं है अर्थात् वादी के लिए यह सम्भव नहीं होता कि प्रतिवादी की उपेक्षा को साबित कर सके !

कई बार घटनाओं की प्रकृति ऐसी होती है कि वादी यह तो साबित कर सकता है कि घटना हुई है लेकिन यह साबित नहीं कर सकता कि किसकी लापरवाही या उपेक्षा की वजह से कारित हुई है !

Continue reading “[ IEA 1872 ] “परिस्थितियां स्वयं बोलती हैं” विभिन्न न्यायिक निर्णयों के साथ एक विस्तृत विश्लेषण”

भारत में बलात्कार कानूनों के तहत “सहमति की अवधारणा”

परिचय

बलात्कार जैसा कि कानून के तहत परिभाषित किया गया है, यौन संभोग का एक अपराध है जहां यह पारस्परिक नहीं है और उसकी इच्छा और अन्य पहलुओं के खिलाफ बल है।

यह निर्धारित करने का प्रमुख सार है कि क्या ऐसा कृत्य बलात्कार के दायरे में आता है, जहां सहमति है।

सहमति तब होती है जब दूसरा व्यक्ति संभोग के कार्य के लिए बिना किसी बल, जबरदस्ती या अनुचित प्रभाव के जानबूझकर सहमत होता है। आम तौर पर सहमति एक कार्य करने की आपकी इच्छा है, जो कहती है कि आप अपनी सभी इंद्रियों में बिना किसी दबाव या जबरदस्ती के ऐसा करने के लिए सहमत हुए हैं।

Continue reading “भारत में बलात्कार कानूनों के तहत “सहमति की अवधारणा””