CRPC 1973 Sec 227 उन्मोचन ( डिस्चार्ज )

जब कभी कोई व्यक्ति अपराध करता है तो न्यायालय में उस व्यक्ति पर अभियोजन चलाया जाता है। जिस व्यक्ति के ऊपर अभियोजन चलाया जाता है उस व्यक्ति को अभियुक्त कहा जाता है।

पुलिस रिपोर्ट पर संस्थित मामले में न्यायालय में अभियुक्त का विचारण होता है। विचारण के उपरांत अभियुक्त की दोषमुक्ति या दोषसिद्धि तय होती है।

परंतु अभियुक्त के पास विचारण के पूर्व ही मामले में उन्मोचित ( डिस्चार्ज) हो जाने का अवसर होता है ।

Continue reading “CRPC 1973 Sec 227 उन्मोचन ( डिस्चार्ज )”

चालान क्या होता है ? जानिए सीआरपीसी की धारा 173 का अर्थ

पुलिस द्वारा न्यायालय में पेश किया जाने वाला चालान एक सामान्य सा शब्द है और नए लॉ छात्रों के लिए यह शब्द कभी-कभी कठिनाई का विषय बन जाता है।

इस आलेख के माध्यम से दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 173 के अंतर्गत ‘चालान’ पर प्रकाश डाला जा रहा है।

➡️ ‘चालान’ अंतिम प्रतिवेदन पुलिस अपने अन्वेषण में अलग-अलग स्तर पर रिपोर्ट प्रेषित करती है। पुलिस अन्वेषण के चरणों में तीन प्रकार की रिपोर्ट भेजती है,

Continue reading “चालान क्या होता है ? जानिए सीआरपीसी की धारा 173 का अर्थ”

IPC 1860 धारा 188 : कब लिया जाता है अपराध का संज्ञान ?

यदि हम दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 195 (1) (क़) को देखें तो हम यह पाएंगे कि भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 172 से धारा 188 (दोनों सम्मिलित) के अंतर्गत किये गए किसी भी अपराध (एवं उसका उत्प्रेरण, प्रयत्न या यह ऐसा अपराध करने के लिए आपराधिक षड़यंत्र) का संज्ञान किसी न्यायालय द्वारा तभी लिया जायेगा जब सम्बंधित लोक सेवक के द्वारा (या ऐसे किसी अधिकारी द्वारा जिसके वह अधीनस्थ है) लिखित परिवाद (Written Complaint) न्यायालय में दाखिल किया जायेगा।

ध्यान रहे कि यह लोक सेवक वही होना चाहिए जिस लोक सेवक की बात भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 172 से धारा 188 के अंतर्गत की गयी है।

Continue reading “IPC 1860 धारा 188 : कब लिया जाता है अपराध का संज्ञान ?”

Crpc 1973 धारा 235 (2) जानिए सजा-पूर्व सुनवाई (Pre-sentence Hearing)

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 का अध्याय 18 (XVIII) सेशन न्यायालय के समक्ष विचारण के बारे में प्रावधान करता है।

इस अध्याय के अंतर्गत धाराएँ 225 से 237 आती हैं।

इसी के अंतर्गत एक धारा 235 है, जिसकी उपधारा (2) दोषी व्यक्ति के सम्बन्ध में सजा-पूर्व सुनवाई (pre-sentence hearing) के बारे में प्रावधान करती है।

इसके अंतर्गत, यदि अभियुक्त दोषसिद्ध किया जाता है तो न्यायाधीश, दण्ड (Sentence) के प्रश्न पर अभियुक्त की सुनवाई करता है, और उसके पश्च्यात ही विधि के अनुसार दण्ड पारित करता है।

Continue reading “Crpc 1973 धारा 235 (2) जानिए सजा-पूर्व सुनवाई (Pre-sentence Hearing)”

104 वाँ संविधान संशोधन , 2020 से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

➡️ 104 वाँ संविधान संशोधन , 2020 भारतीय संविधान में संशोधन के लिए 126 वें विधेयक के रूप में कानून व न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद जी द्वारा प्रस्तुत किया गया था

➡️ लोकसभा द्वारा 10 दिसम्बर 2019 व राज्यसभा द्वारा 12 दिसम्बर 2019 को पास किया गया

➡️ अनुच्छेद 334 में संशोधन के द्वारा लोकसभा व राज्य की विधानसभाओ में SC / ST समुदाय के आरक्षण को 80 वर्ष यानि कि 2030 तक के लिए बढ़ा दिया गया

➡️ लोकसभा व राज्य की विधानसभाओ में आंग्ल भारतीय समुदाय के लिए आरक्षित सीटों के प्रावधान को हटा दिया गया

➡️ यह 25 जनवरी , 2020 से लागू हुआ |