CRPC 1973 जानिये आपराधिक मामलों का एक न्यायालय से दूसरे न्यायालय में अंतरण कब किया जा सकता है

दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 406 से 412 इस बारे में प्रावधान करती है

यह अध्याय एक न्यायालय से दूसरे न्यायालय में मामलो के अंतरण से सम्बंधित है । यानि किसी मामले को किसी न्यायालय में अंतरित कराने के लिए बहुत से कारण हो सकते हैं

जैसे कि

( 1 ) न्यायालय से न्याय न मिलने की आशंका

( 2 ) पक्षकारो की सुविधा

( 3 ) न्याय के हित में अन्य कारण

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IPC 1860 Sec 34 सामान्य आशय Common Intention महत्वपूर्ण वादों सहित

दोस्तों आज हम भारतीय दंड संहिता 1860 के एक महत्वपूर्ण टॉपिक पर चर्चा करते हैं |

जैसा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 34 सामान्य आशय को अग्रसर करने में कई व्यक्तियों द्वारा किया गया कार्य से संबंधित है

भारतीय दण्ड संहिता , 1860 की धारा 34 में सामान्य आशय का उल्लेख किया गया है जो इस प्रकार है ,

” जबकि कोई आपराधिक कार्य कई व्यक्तियों द्वारा अपने सबके सामान्य आशय को अग्रसर करने में किया जाता है , तब ऐसे व्यक्तियों में से हर व्यक्ति उस कार्य के प्रति उसी प्रकार दायित्व के अधीन है , मानो वह कार्य अकेले उसी ने किया हो”

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CPC 1908 आज्ञापत्र Precept

आज हम सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के एक महत्वपूर्ण टॉपिक आज्ञापत्र के बारे में चर्चा कर रहे हैं

सीपीसी की धारा 46 आज्ञापत्र के बारे में प्रावधान करती है, जब कभी सिविल न्यायालय में सिविल मामले में न्यायालय द्वारा कोई डिक्री पारित की जाती है तो न्यायालय का अगला स्टेप डिक्री का निष्पादन करना होता है

यदि हम डिक्री के निष्पादन की बात करें तो उसमें विभिन्न चरण होते हैं कि डिक्री का निष्पादन कैसे होगा, किन-किन तरीकों से होगा, डिक्री का निष्पादन करने वाले न्यायालय की क्या शक्तियां होगी , इन सभी के बारे में विस्तृत रूप से सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा 51 में प्रावधान किए गए हैं जिन्हें हम इस लेख में नहीं समझेंगे उसके लिए हम अगला लेख प्रकाशित करेंगे क्योंकि गागर में सागर भरना संभव नहीं है

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CPC 1908 सिविल वादो की प्रक्रिया [Civil Suit Process] IMP. FOR MAINS EXAM

CPC में सिविल वादो की प्रक्रिया के बारे में बताया गया है, जिसे आज हम जानेंगे एवं सरलता से समझने का प्रयास करेंगे –

सिविल प्रक्रिया संहिता विचारण की प्रक्रिया बताती है। सहिंता के अनुसार व्यवस्थित प्रक्रिया दी गई है तथा कोई भी मुकदमा किस प्रकार प्रारंभ से समाप्त होता है।

वाद पत्र एवं वाद के पक्षकार (आदेश 1)

सिविल प्रक्रिया संहिता में वादों का प्रारंभ वाद पत्र से किया जाता है।

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CRPC 1973 अपील Appeal

CRPC 1973 की धारा 372 यह उपबंधित करती है कि किसी व्यक्ति को किसी दण्ड न्यायालय के आदेश के विरुद्ध अपील करने का कोई मूलभूत अधिकार नही है ।

दण्ड न्यायालय के किसी निर्णय व आदेश के विरुद्ध अपील संहिता द्वारा या तत्समय प्रवृत किसी विधि द्वारा जैसा उपबंधित हो , के सिवाय नही किया जा सकता है |

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