IPC 1860 धारा 146 बल्वा करना Rioting

जब किसी विधिविरुद्ध जमाव द्वारा या उसके किसी सदस्य द्वारा ऐसे जमाव के सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने में बल या हिंसा का प्रयोग किया जाता है , तब ऐसे जमाव का हर सदस्य बल्वा करने के अपराध का दोषी होगा ।

इस धारा का आवश्यक तत्व

उपयुक्त परिभाषा का विश्लेषण करने पर बल्वा के निम्न आवश्यक तत्व स्पष्ट होते हैं

1. विधिविरुद्ध जमाव पांच या पांच से अधिक व्यक्तियों द्वारा हो ;

2. ऐसे जमाव का एक सामान्य उद्देश्य हो ;

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CRPC 1973 SEC 406

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 406 :

[CrPC] की धारा 406 के अनुसार जब भी सुप्रीम कोर्ट को यह प्रतीत करवाया जाता है कि न्याय के उद्देश्य के लिए यह समीचीन है कि इस धारा के तहत आदेश किया जाए तो सुप्रीम कोर्ट किसी विशेष मामले या अपील को एक हाईकोर्ट से दूसरे हाईकोर्ट या किसी हाईकोर्ट के अधीनस्थ आपराधिक न्यायालय से दूसरे हाईकोर्ट के अधीनस्थ आपराधिक न्यायालय में स्थानांतरित करने का निर्देश दे सकता है।

धारा 406 आगे कहती है कि सुप्रीम कोर्ट भारत के एटोर्नी जनरल या हितबद्ध पक्षकार के आवेदन पर ही इस धार के तहत कार्य कर सकता है।

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Constitution Article 15

आर्टिकल 15 :

भारतीय संविधान का आर्टिकल 15 विधि के समक्ष समता के अधिकार बारे में है। अर्थात विधि के लिए सभी नागरिक बराबर हैं और जात पात, धर्म, लिंग के आधार पर नागरिकों में कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।

आर्टिकल 15 में कही गई बातों की शुरुआत आर्टिकल 14 से होती है, जिसमें दो मुख्य बातें कही गई हैं।

1. आर्टिकल 14 में कहा गया है कि विधि के समक्ष समता, सभी नागरिक समान हैं।

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CRPC 1973 संज्ञेय और असंज्ञेय अपराध

संज्ञेय अपराध :

संज्ञेय और असंज्ञेय अपराध की परिभाषा क्रीमिनल प्रोसिजर कोड (CrPC 1973) की धारा 2 (सी) और 2 (एल) में दी गई है।

इस अधिनियम की धारा 2 (सी) कहती है कि ऐसा अपराध जिसमें पुलिस किसी व्यक्ति को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार कर सकती है, वह संज्ञेय अपराध कहलाता है।

पुलिस के पास संज्ञेय अपराधों में बिना वारंट गिरफ्तार करने के अधिकार है।

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CRPC 1973 न्यूसेंस अथवा आशंकित खतरे के अर्जेंट मामले

हेलो फ्रेंड्स आज हम फिर से कुछ नया जानेंगे आज हम बात करेंगे न्यूसेंस अथवा आशंकित खतरे के अर्जेंट मामले कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्ति के बारे में

दंड प्रक्रिया संहिता के अनुसार बात करें तो न्यूसेंस या आशंकित खतरे की अर्जेंट मामले में आदेश जारी करने की जो शक्ति है वह कार्यपालक मजिस्ट्रेट को दी गई है Sec 144

इस धारा के तहत कार्रवाई का आधार स्थिति पर निर्भर करता है जो अस्थाई प्रकृति की स्थिति का अनुजचिंतन करती है

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